बे-सुध पड़ा रहूँ हूँ उस मस्त-ए-नाज़ बिन मैं
आता है होश मुझ को अब तो पहर पहर में
“Without that intoxicated lover, I remain unconscious; My senses return to me only every few hours.”
— میر تقی میر
معنی
बिना उस मदहोश नज़ाकत वाले महबूब के मैं बेसुध पड़ा रहता हूँ; मेरा होश अब तो हर कुछ घंटों के अंतराल पर आता है।
تشریح
ये शेर उस मदहोशी की स्थिति बयान करता है जिसमें आशिक़ अपनी महबूब के जादू में खोया हुआ है। होश का धीरे-धीरे आना, हर पहर में, यह एहसास कि महबूब की यादें ही जीवन का एकमात्र सत्य हैं।
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