वो अपने हुस्न की मस्ती से हैं मजबूर-ए-पैदाई
मिरी आँखों की बीनाई में हैं असबाब-ए-मस्तूरी
“They are compelled by the intoxication of their beauty, In the gaze of my eyes, is the essence of intoxication.”
— علامہ اقبال
معنی
وہ اپنے حسن کی مستی سے ہیں مجبور-ए-پیدائی، میری آنکھوں کی بنائی میں ہیں اسبابِ مستوری۔
تشریح
यह शेर महबूब के हुस्न की उस मदहोशी का ज़िक्र है जो किसी के वजूद को अपनी गिरफ्त में ले लेती है। शायर कहते हैं कि वह अपने हुस्न के नशे में मजबूर हैं, और महबूब की निगाहों में ही मदहोशी का पूरा अक्स समाया है।
