ग़ज़ब है ऐन-ए-करम में बख़ील है फ़ितरत
कि लाल-ए-नाब में आतिश तो है शरारा नहीं
“How stingy is the nature, though full of grace and bounty, For in the Beloved's essence, there is fire, not merely a spark.”
— علامہ اقبال
معنی
करम की आँखों में क्या कंजूसी है, कि प्रिय के स्वरूप में केवल चिंगारी नहीं, बल्कि आग है।
تشریح
यह शेर इंसानी अहसासों की गहराई और हिचक को बयान करता है। शायर कहते हैं कि ऐन-ए-करम में भी एक बख़ील फ़ितरत होती है, और ज़बान से निकली आग महज़ शरारा नहीं, बल्कि एक गहरा और स्थायी शोला होती है।
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