निगाह-ए-गर्म कि शेरों के जिस से होश उड़ जाएँ
न आह-ए-सर्द कि है गोसफ़ंदी ओ मेशी
“The gaze of warmth, by which one's senses fly away, Not the sigh of coldness, that is the bed of the grave.”
— علامہ اقبال
معنی
یہ گرم نگاہ کی بات ہے جس سے ہوش اڑ جائیں، نہ کہ سرد آہ کی جو گُفتارِ قبر ہے۔
تشریح
इकबाल साहब कहते हैं कि दिल को तोड़ने वाली कोई ठंडी आह नहीं होती। असली ज़ख़्म तो उस 'गर्म निगाह' से लगता है, जो एक पल में इंसान को बेबस कर दे। ये शेर इश्क़ के नशा और उसके असर की बात करता है।
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