फिराक़ बज़्म-ए-चिरागां है महफ़िल-ए-रिन्दां
सजे हैं पिघली हुई आग से छलकते अयाग़
“In the gathering of the 'Chiragan' (lamps), the gathering of the 'Rindas' (ecstatics) is a separation; the legs are adorned, overflowing with melted fire.”
— فراق گورکھپوری
معنی
چراگاں کی بزم میں رندوں کی محفل ایک فراق ہے؛ پاؤں پگھلی ہوئی آگ سے سجے ہیں اور چھلکتے ہیں۔
تشریح
यह शेर रूहानी जोश और जुनून से भरी एक महफ़िल का तसव्वुर पेश करता है। 'पिघली हुई आग से छलकते अयाग़' का मतलब है कि वहाँ का हर नज़ारा, हर अदा, एक तीव्र, बेकाबू जुनून को बयाँ कर रहा है। यह बेफ़िक्र और जोश से भरी रूहों का जमावड़ा है।
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