बस कि मुझ हाल सूँ हम-सर है परेशानी में — वली दकनी

बस कि मुझ हाल सूँ हम-सर है परेशानी में दर्द कहती है मिरा ज़ुल्फ़ तिरे कान में आ

“So closely does your disheveled tress match my distressed state, that it leans into your ear to whisper the story of my pain.”

— वली दकनी

अर्थ

तुम्हारी बिखरी हुई ज़ुल्फ़ व्याकुलता में मेरी हालत के इतनी समान है कि वह तुम्हारे कान के पास आकर मेरा दुख सुनाती है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने महबूब की बिखरी हुई ज़ुल्फ़ों और अपने दिल की बेचैनी के बीच एक बेहद खूबसूरत रिश्ता क़ायम किया है। लफ़्ज़ 'परेशानी' का मतलब उलझन भी है और बिखराव भी, इसलिए शायर कहता है कि तुम्हारी ज़ुल्फ़ें भी मेरी तरह ही बेहाल और उलझी हुई हैं। जब वो उड़ती हुई ज़ुल्फ़ तुम्हारे कान के पास आती है, तो लगता है जैसे वो मेरी हमदर्द बनकर मेरे दिल का सारा दर्द चुपके से तुम्हारे कान में कह रही हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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