दिल हुआ है मिरा ख़राब-ए-सुख़न देख कर हुस्न-ए-बे-हिजाब-ए-सुख़न

“My heart lies utterly undone, enamored of verse; having beheld the unveiled beauty of poetry.”

— वली दकनी
अर्थ

कविता के बेपरदा और निखरे हुए सौंदर्य को देखकर मेरा दिल शायरी के शौक में दीवाना और तबाह हो गया है।

विस्तार

यहाँ शायर शायरी यानी 'सुख़न' को महज़ अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि एक हसीन महबूब की तरह देखता है। जब शायरी का हुस्न बिना किसी पर्दे के अपने पूरे जमाल के साथ सामने आया, तो शायर का दिल उस पर पूरी तरह फ़िदा होकर 'ख़राब' यानी दीवाना हो गया। यह शेर उस दीवानगी और समर्पण को बयां करता है, जो किसी सच्चे फ़न की बेपनाह ख़ूबसूरती को देखकर एक संवेदनशील दिल में उतर जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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