“Thus prays Tulsidas: O delight of the minds of Shiva, Shesha, and sages, dwell forever in the lotus of my heart, and vanquish the wicked hordes of lust and desire.”
तुलसीदास प्रार्थना करते हैं कि हे शिव, शेषनाग और मुनियों के मन को आनंद देने वाले तथा काम-क्रोध आदि दुष्ट विकारों का नाश करने वाले प्रभु, आप मेरे हृदय रूपी कमल में वास कीजिए।
इस सुंदर प्रार्थना में गोस्वामी तुलसीदास जी भगवान श्री राम से बहुत ही विनम्र विनती करते हैं। वे कहते हैं कि हे प्रभु, आप भगवान शिव, शेषनाग और सभी मुनियों के मन को आनंद देने वाले हैं। आप सदा के लिए मेरे हृदय रूपी कमल में वास कीजिए। तुलसीदास जी प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि वे उनके मन में मौजूद काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे विकारों का नाश कर दें। यह दोहा हमें सिखाता है कि जब हृदय में ईश्वर का वास होता है, तो मन के सारे विकार अपने आप शांत हो जाते हैं।
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