अब नाथहिं अनुरागु जागु जड़ त्यागु दुरासा जी तें । बुझै न काम-अगिनि तुलसी कहुँ विषय-भोग बहु घी तें ॥

“Awaken now, dull soul, love the Lord, and cast false hopes from your heart; can the fire of desire ever be quenched, O Tulsi, by pouring the fuel of worldly pleasures?”

— तुलसीदास
अर्थ

हे मूर्ख मन! अब जाग जा, प्रभु से प्रेम कर और अपने हृदय से व्यर्थ की आशाओं को त्याग दे। तुलसीदास कहते हैं कि सांसारिक भोग-विलास रूपी घी डालने से वासना की आग कभी शांत नहीं हो सकती।

विस्तार

तुलसीदास जी अपने मन को समझाते हुए कहते हैं कि हे अज्ञानी मन, अब तो जाग जा। सांसारिक तृष्णाओं और झूठी उम्मीदों को अपने दिल से निकाल दे और प्रभु के प्रेम में रम जा। वे एक सुंदर दृष्टांत देते हुए समझाते हैं कि वासना और इच्छाओं की आग कभी भी भोग-विलास से शांत नहीं हो सकती। जैसे जलती हुई आग में घी डालने से वह बुझने के बजाय और तेजी से भड़क उठती है, ठीक वैसे ही संसार के भोगों में डूबने से इच्छाएं कभी खत्म नहीं होतीं। सच्चा सुख और शांति प्रभु के चरणों में ही संभव है।

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