“Shall I ever come to live in such a sacred way? By the compassion of the gracious Lord Rama, shall I adopt the saintly nature one day?”
क्या मैं कभी इस प्रकार का पवित्र जीवन जी सकूँगा? क्या कृपालु श्री रघुनाथ जी की दया से मैं संतों जैसा स्वभाव अपना पाऊँगा?
इस दोहे में भक्त अपने मन की गहरी पुकार व्यक्त कर रहा है। वह प्रभु से प्रार्थना करते हुए पूछता है कि क्या कभी ऐसा दिन आएगा, जब वह संतों जैसा सरल और पवित्र जीवन जी सकेगा? वह जानता है कि मानवीय कमजोरियों को पार करना आसान नहीं है। इसलिए वह कृपालु श्रीराम की दया पर भरोसा करता है। उसका मानना है कि प्रभु की कृपा से ही व्यक्ति सांसारिक मोह-माया को छोड़कर संतों का शांत, करुणामयी और संतोषी स्वभाव अपना सकता है। यह प्रार्थना आत्म-सुधार और आंतरिक शांति की एक विनम्र इच्छा है।
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