“Tulsi says, he alone is in every way a true friend and dearer than life itself, through whom love for Rama's feet is born; this alone is my belief.”
तुलसीदास जी कहते हैं कि जिससे श्रीराम के चरणों में प्रेम उत्पन्न हो, वही हर प्रकार से हमारा परम हितैषी और प्राणों से भी अधिक प्यारा है; यही हमारा निश्चित विचार है।
संत तुलसीदास जी इस दोहे में बहुत ही सुंदर विचार व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि जिस किसी के संग से प्रभु श्री राम के चरणों में हमारा प्रेम और विश्वास बढ़ता है, वही इंसान हर तरह से हमारा सबसे बड़ा हितैषी है। ऐसा व्यक्ति हमारे लिए संसार की सबसे अनमोल पूंजी है और प्राणों से भी अधिक प्रिय है। तुलसीदास जी का यही दृढ़ मत है। यह दोहा हमें सिखाता है कि सच्चा साथी वही है जो हमारे मन को सांसारिक भटकाव से निकालकर भक्ति और अच्छाई के मार्ग पर ले जाता है।
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