વળી વળી નીરખે છે કુંજગલીઃ પૂછે છે, કેમ અલી! ક્યાં ગઈ'તી આમ? રાધાનું નામ તમે વાંસળીના સૂર મહીં વ્હેતું ના મેલો, ઘનશ્યામ!

“She gazes at the bower path again and again, asking, "Dear friend, where did you go like this?" O Ghanshyam, let not Radha's name flow through the melodies of your flute!”

— सुरेश दलाल
अर्थ

वह बार-बार कुंजगली को देखती है और पूछती है, 'हे सखी! तुम कहाँ चली गई थीं?' हे घनश्याम, अपनी बाँसुरी की धुन में राधा का नाम मत आने दो।

विस्तार

यह प्यारा दोहा राधा और कृष्ण की कहानियों से एक चंचल तनाव और लालसा का क्षण दर्शाता है। कल्पना कीजिए एक गोपी राधा को वापस आते हुए देखती है, शायद कृष्ण से गुप्त मुलाकात के बाद। वह चिढ़ाते हुए पूछती है, 'अरी सखी, तुम इतनी देर से कहाँ थीं?' फिर, भावना बदल जाती है। गोपी कृष्ण को affectionate 'घनश्याम' कहकर पुकारती है और एक हार्दिक विनती करती है: 'कृपया, राधा का नाम अपनी बांसुरी की मनमोहक धुनों में बार-बार मत बहने दो।' यह ईर्ष्या और स्नेह की एक मीठी अभिव्यक्ति है, जो यह उजागर करती है कि कृष्ण का संगीत राधा के प्रति उनके प्रेम से कितना जुड़ा हुआ था, जिससे यह सभी के लिए स्पष्ट हो जाता था।

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