ग़ज़ल

शरणम् मम!

شرنم مم!
सुरेश दलाल· Ghazal· 5 shers

यह ग़ज़ल अद्भुत उदारता को दर्शाती है, जहाँ वक्ता हमेशा माँगी गई चीज़ से कहीं अधिक देने को तत्पर रहता है। मछली के लिए दरिया देने से लेकर एक सुर के लिए पूरा गीत प्रदान करने तक, यह असीमित और निःस्वार्थ देने की भावना पर ज़ोर देती है। वक्ता हर छोटी-सी माँग को एक विशाल भेंट में बदल कर प्रचुर दान की भावना का प्रतीक है।

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
અમે એવા છઈએ : અમે એવા છઈએ, તમે માછલી માગો ને અમે દરિયો દઈએ.
हम इतने उदार हैं कि यदि आप हमसे एक मछली माँगेंगे, तो हम आपको पूरा सागर दे देंगे। यह हमारी असीम उदारता को दर्शाता है।
2
તમે અમથું જુઓ તો અમે દઈ દઈએ સ્મિત, તમે સૂર એક માગો તો દઈ દઈએ ગીત,
आप बस देखेंगे तो हम आपको एक मुस्कान देंगे। अगर आप एक धुन मांगेंगे, तो हम आपको एक पूरा गीत देंगे।
3
તમે વાંસળી કહો ત્યાં અમે વૃન્દાવન જઈએ, અમે તારા બગીચાની માલણ છઈએ.
बाँसुरी का नाम लेते ही हम वृंदावन चले जाते हैं, क्योंकि हम तुम्हारे ही बगीचे के माली हैं।
4
તમે પગલું માંડો કે અમે થઈ જઈએ પંથ, અમે ફૂલોની પાંદડીમાં છૂપી વસંત,
आप एक कदम बढ़ाओ और हम राह बन जाते हैं; हम फूलों की पंखुड़ियों में छिपी हुई बसंत हैं।
5
તમે પૂછો નહિ અમને અમે કેવા છઈએ, અમે તારા આકાશમાં પારેવાં છઈએ.
आप हमसे यह मत पूछिए कि हम कैसे हैं, हम आपके आकाश में कबूतर हैं।
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