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કંપ્યું જળનું રેશમ પોત; કિરણ તો ઝૂક્યું થઈ કપોત.

The water's silken fabric quivered;The ray, a dove, gracefully bowed.

सुरेश दलाल
अर्थ

जल का रेशमी पोत काँप उठा; किरण तो कबूतर बनकर झुक गई।

विस्तार

यह खूबसूरत दोहा पानी और प्रकाश के बीच एक शांत और कोमल रिश्ते को दर्शाता है। यह कहता है, "पानी का रेशमी पोत कांप उठा।" जरा कल्पना कीजिए पानी की सतह को, जो धीरे-धीरे चमक रही है और लहरें ले रही है, ठीक एक नाजुक रेशमी कपड़े की तरह। फिर आगे कहा गया है, "किरण तो कबूतर बनकर झुक गई।" यहाँ, प्रकाश की एक किरण सिर्फ मुड़ नहीं रही या परावर्तित नहीं हो रही, बल्कि उसे एक प्यारे कबूतर के रूप में दिखाया गया है, जो पानी की ओर धीरे से झुक रहा है। यह एक ऐसी शांति का एहसास कराता है जहाँ प्रकाश बड़े प्यार से पानी को छूता है और उसके साथ घुलमिल जाता है, जिससे खामोश सुंदरता और नरमी का एक पल बनता है। यह सचमुच एक हृदयस्पर्शी और सुंदर कल्पना है।

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पाठ
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