चरन कमल बंदौं हरि राई । जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै अंधे को सब कुछ दरसाई ॥

“I bow before the lotus feet of the Lord Divine, by whose grace the lame scales the mountain and the blind is granted sight to behold all.”

— सूरदास
अर्थ

मैं प्रभु श्रीहरि के कमल सदृश चरणों की वंदना करता हूँ, जिनकी कृपा से लंगड़ा मनुष्य पर्वत लांघ जाता है और अंधे को सब कुछ दिखाई देने लगता है।

विस्तार

इस सुंदर पद में भक्तिकवि सूरदास भगवान के कमल जैसे पावन चरणों की वंदना करते हैं। वे प्रभु की असीम कृपा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि उनकी दया से असंभव भी संभव हो जाता है। ईश्वर की कृपा पाकर एक पैर से लाचार व्यक्ति भी ऊंचे पहाड़ों को पार कर सकता है, और जिसे दिखाई नहीं देता, उसे भी सब कुछ नजर आने लगता है। यह भाव हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें या कमजोरियां क्यों न हों, प्रभु पर सच्चा विश्वास हमें हर बाधा से पार ले जाने की शक्ति देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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