ज़िक्र-ए-दुनिया नक़्श-ए-मुर्दा को हुआ आब-ए-हयात — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

ज़िक्र-ए-दुनिया नक़्श-ए-मुर्दा को हुआ आब-ए-हयात मर के ये सीमाब फिर ज़िंदा दोबारा हो गया

“The tale of the world became the water of life for the dead man's form, This quicksilver, having died, once more came back alive again.”

— शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

अर्थ

दुनिया की चर्चा मुर्दा आकृति के लिए आब-ए-हयात बन गई, और यह पारा मर कर फिर से दोबारा ज़िंदा हो गया।

विस्तार

यह शेर कहता है कि दुनिया की चर्चा किसी मुर्दा छवि को भी फिर से जीवन दे सकती है। जब लोग किसी का ज़िक्र करते हैं, तो वही ज़िक्र आब-ए-हयात बन जाता है, यानी जीवन देने वाला पानी। शायर इसे पारे से जोड़ता है, जो मानो मरकर भी फिर हिलने लगता है। इसी तरह एक नाम जो मिट रहा हो, लोगों की याद और बातों से दोबारा जी उठता है। संदेश सरल और आशा भरा है: जब तक दुनिया तुम्हारा नाम लेती रहे, तुम सच में कभी खत्म नहीं होते। याद रखा जाना ही एक तरह की अमरता है, जो हमें औरों के दिलों में फिर जिला देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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