मदवश अश्क गिरा देन गे नज़र से इक दिन — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“Drunk with passion, one day these eyes will let their tears fall from my sight; From the very beginning, this alone is what these eyes reveal to me.”
अर्थ
मस्ती में चूर ये आँखें एक दिन मेरी नज़र से आँसू गिरा देंगी; शुरू से ही ये आँखें मुझे बस यही बात दिखाती रही हैं।
विस्तार
शायर अपने महबूब की आँखों की बात कर रहा है। वह कहता है कि ये आँखें अपने ही नशे में, अपनी सुंदरता और गुरूर में इतनी मगन हैं कि एक दिन इसी नज़र से एक आँसू ज़रूर गिरेगा। उसे लगता है कि अनादि काल से ही इन आँखों में यही लिखा हुआ दिखाई देता है। यहाँ एक कोमल सी निश्चितता है। वह महसूस करता है कि सबसे गर्वीली और मनमोहक आँखों के भीतर भी एक दर्द छिपा रहता है, और देर-सवेर वही छिपा भाव एक आँसू बनकर बह निकलता है। यह इस बात का नाज़ुक चिंतन है कि गुरूर और आँसू, सुंदरता और उदासी अक्सर एक ही दिल में साथ रहते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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