होता जो न पैवंद-ए-ज़मीं तेरी गली में — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“Had it not found its resting place as a patch upon the earth of your lane, This heart would surely have found its peace already, laid deep beneath the ground.”
अर्थ
अगर यह दिल तेरी गली की ज़मीन में पैवंद होकर न मिल जाता, तो यह कब का ज़मीन के नीचे दफ़न होकर चैन पा चुका होता।
विस्तार
यहाँ शायर गहरी मोहब्बत से कहता है कि अगर उसका दिल तेरी गली की मिट्टी में पैवंद होकर, ज़मीन से लगकर न रह गया होता, तो वह कब का ज़मीन के नीचे, यानी क़ब्र में आराम पा चुका होता। कहने का मतलब यह है कि तेरी गली में पड़े रहना ही उसे जीवित रखे हुए है। तेरे दर की ख़ाक में मिल जाना उसके लिए किसी भी क़ब्र के सुकून से ज़्यादा प्यारा है। यह महबूब के पास रहने की वह चाहत है, जो मौत से भी बढ़कर है। महबूब की गली ही उसकी असली पनाह और जीने की वजह बन गई है।
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