आज 'नाजी' से रम न कर ऐ शोख़ देख मुद्दत सीं राम है तेरा

“Do not shy away from Naji today, O playful one; look, he has been tamed to your will for so long.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

ऐ चंचल महबूब, आज नाजी से मत कतरा और मत भाग; देख कि वह बड़े लंबे समय से तेरे वश में और तेरा आज्ञाकारी है।

विस्तार

यहाँ शायर ने 'रम' (हिरन की तरह बिदकना या दूर भागना) और 'राम' (वश में होना या सध जाना) के ख़ूबसूरत लफ़्ज़ी खेल से दिल छू लेने वाली बात कही है। वो अपने शोख़ और चंचल महबूब से बड़े लाड़ से कहते हैं कि अब मुझसे परहेज़ न करो, आख़िर मैं तो बरसों से तुम्हारा मुरीद और ग़ुलाम हूँ। इस शेर में महबूब की अठखेलियों भरी नज़ाकत और आशिक़ की मुद्दतों पुरानी वफ़ा का एक बहुत प्यारा नज़ारा दिखता है।

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