“I wander lost in endless thought, met only by their haughty charms; / No contrivance works, O Naji, to clasp that lover in my arms.”
मैं सोच-सोच कर भटक रहा हूँ और जब प्रियतम नज़र आते हैं तो उनके तेवर बाँके और इतराने वाले होते हैं; ऐ नाजी, कोई ऐसी तरकीब या उपाय नहीं बन पा रहा कि मैं उस साजन को अपने सीने से लगा सकूँ।
इस शेर में आशिक़ की तड़प और महबूब के नाज़-ओ-अंदाज़ की बड़ी खूबसूरत तस्वीर है। शायर लगातार महबूब के ख़यालों में भटक रहा है, पर जब वो सामने आता है तो उसके तेवर इतने बाँके और नख़रीले होते हैं कि पास जाने की हिम्मत नहीं होती। आशिक़ बेबसी से कहता है कि कोई ऐसी जुगत या तदबीर नहीं बन पा रही, जिससे वह अपने महबूब को बाहों में भरकर गले से लगा सके।
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