ये दौर गुज़रा कभी न देखीं पिया की अँखियाँ ख़ुमार-मतियाँ कहे थे मरदुम शराबी उन कूँ निकल गईं अपनी दे ग़लतियाँ

“The wine-round passed, yet never did I see my beloved's eyes heavy with intoxication; People had called them drunken cups—alas, it turned out to be our own illusion.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

शराब का यह दौर बीत गया लेकिन महबूब की मदभरी आँखें कभी देखने को न मिलीं। लोग उन्हें शराबी कहते थे, मगर यह बात हमारी अपनी ही भूल साबित हुई।

विस्तार

इस शेर में एक बड़ा ही प्यारा सा शिकवा और अधूरापन छुपा है। शायर कहता है कि शराब का दौर भी बीत गया और महफ़िल ख़त्म हो गई, मगर महबूब की आँखों में वह नशीला ख़ुमार देखने को न मिला जिसका दुनिया भर में ज़िक्र था। लोग तो कहते थे कि उनकी आँखें शराब के प्यालों जैसी हैं, लेकिन शायर को एहसास होता है कि यह महज़ एक सुनी-सुनाई बात थी और वह ख़ुद ही एक मीठी ग़लतफ़हमी में मुब्तिला रहा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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