तोशक बाला पोश रज़ाई है भूले मजनूँ बरसों तक जब दिखलावे ज़ुल्फ़ सजन की बन में आवते अब्रों को

“Mattress, coverlet, and quilt—Majnun forgot them all for years on end, / Whenever the beloved's dark tresses showed themselves to the wilderness clouds.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

जब प्रियतम की ज़ुल्फ़ें जंगल में उमड़ते बादलों को अपना दीदार कराती हैं, तब मजनूँ बरसों तक तोशक, चादर और रज़ाई जैसे बिस्तरों के आराम भूल जाता है।

विस्तार

इस शेर में मजनूँ की बेख़ुदी और इश्क़ की दीवानगी को बहुत ख़ूबसूरती से पेश किया गया है। जंगल और सहरा में भटकता मजनूँ घर-बार, गद्दे और रज़ाई जैसे तमाम दुनियावी आरामों को बरसों से भुला चुका है। उसके लिए तो महबूब की घनी, श्यामल ज़ुल्फ़ें ही आसमान पर उमड़ते बादलों की तरह हैं, जिनकी छाँव मिलते ही उसे किसी और सहारे या बिस्तर की ज़रूरत नहीं रहती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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