दिल का खोज न पाया हरगिज़ देखा खोल जो क़ब्रों को जीते जी ढूँडे सो पावे ख़बर करो बे-ख़बरों को

“No trace of the heart was ever found, though graves were unsealed and sought; Who searches in life alone shall find—let the unaware be taught.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

क़ब्रों को खोलकर देखने पर भी दिल का कोई सुराग़ नहीं मिला। इसे वही पा सकता है जो जीते-जी तलाश करे, इसलिए बे-ख़बर लोगों को इस बात से आगाह कर दो।

विस्तार

शायर एक बेहद गहरी बात समझाते हैं कि क़ब्रों को कुरेदने से भी दिल का कोई सुराग़ नहीं मिला, क्योंकि ख़ाक में सिर्फ़ बेजान जिस्म होता है, रूहानी एहसास नहीं। यहाँ 'दिल' केवल एक अंग नहीं, बल्कि इश्क़, चेतना और असल ज़िंदगी का केंद्र है जिसे मरने के बाद नहीं ढूँढा जा सकता। यह शेर उन बे-ख़बर लोगों के लिए एक सौम्य चेतावनी है कि अगर ख़ुद को और रूह की हक़ीक़त को पाना है, तो जीते-जी ही इसकी तलाश कर लो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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