“All the masters of wealth crave only sycophancy; they pay no heed to true skill, nor glance at artistry.”
सभी दौलतमंद लोग केवल चापलूसी चाहते हैं; वे हुनर या प्रतिभा की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं देते हैं।
यह शे'र सत्ता और दौलत के खोखलेपन पर एक सीधा और बेहद मारक तंज है। शायर कहता है कि जिन लोगों के पास दौलत और ताक़त है, उन्हें सच्चे हुनर और कमाल की कोई परवाह नहीं होती, उनकी रूह तो बस झूठी चापलूसी की भूखी रहती है। यह हर उस सच्चे कलाकार का दर्द है जिसकी कड़ी मेहनत और काबिलियत को दरकिनार कर, समाज में केवल जी-हुज़ूरी करने वालों को नवाज़ा जाता है।
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