हैं ख़ुशामद-तलब सब अहल-ए-दुवल ग़ौर करते नईं हुनर की तरफ़

“All the masters of wealth crave only sycophancy; they pay no heed to true skill, nor glance at artistry.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

सभी दौलतमंद लोग केवल चापलूसी चाहते हैं; वे हुनर या प्रतिभा की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं देते हैं।

विस्तार

यह शे'र सत्ता और दौलत के खोखलेपन पर एक सीधा और बेहद मारक तंज है। शायर कहता है कि जिन लोगों के पास दौलत और ताक़त है, उन्हें सच्चे हुनर और कमाल की कोई परवाह नहीं होती, उनकी रूह तो बस झूठी चापलूसी की भूखी रहती है। यह हर उस सच्चे कलाकार का दर्द है जिसकी कड़ी मेहनत और काबिलियत को दरकिनार कर, समाज में केवल जी-हुज़ूरी करने वालों को नवाज़ा जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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