पूछिए कुछ कहें हैं कुछ 'नाजी' आ पड़ीं रोज़गार की बातें

“Ask him of one thing, he speaks of quite another, O Naji; alas, the burdensome cares of livelihood have intervened.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

ऐ नाजी, उनसे पूछिए कुछ और तो वे कुछ और ही जवाब देते हैं, क्योंकि बीच में रोज़गार और दुनियादारी की बातें आ पड़ी हैं।

विस्तार

नाजी यहाँ ज़िंदगी की उस कड़वी हकीकत को बयां कर रहे हैं, जहाँ पेट पालने और रोज़ी-रोटी की चिंता इंसान के दिलो-दिमाग पर पूरी तरह हावी हो जाती है। कोई उनसे दिल का हाल या मोहब्बत की बात पूछता है, मगर बेख्याली में उनके मुंह से दुनियावी मजबूरियों के दुखड़े निकलने लगते हैं। यह शे'र बड़ी सादगी से दिखाता है कि ज़िंदा रहने की जद्दोजहद में हमारे ख्वाब और जज़्बात अक्सर किस तरह पीछे छूट जाते हैं।

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