“That splendor Moses saw revealed upon Mount Sinai's height, / Like a flash of lightning, yesterday, I too glimpsed from afar that light.”
जिस दिव्य रूप (नूर) को हज़रत मूसा ने तूर पहाड़ पर प्रकट होते देखा था, कल बिजली की कौंध की तरह मैंने भी उसे दूर से देखा।
यह शेर हज़रत मूसा और कोह-ए-तूर के मशहूर वाक़िए से जुड़ा है, जहाँ उन्होंने ईश्वर के नूर की एक झलक देखी थी। शायर अपने महबूब के हुस्न को उसी ईश्वरीय नूर के बराबर रखते हुए कहता है कि जो दीदार मूसा को पहाड़ पर हुआ था, वैसा ही एक बिजली जैसा कौंधता नज़ारा कल मुझे भी दूर से नसीब हुआ। यह मोहब्बत की उस शिद्दत को बयां करता है, जहाँ महबूब की एक पल भर की झलक भी ज़िंदगी को रूहानी रोशनी से भर देती है।
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