“If I turn my steps toward my love, I find I cannot go; and should she venture toward Mir, she is not let to come.”
अगर मैं अपने महबूब की ओर जाना चाहूँ तो मुझसे जाया नहीं जाता, और अगर वह मीर की तरफ़ आना चाहे तो उसे आने नहीं दिया जाता।
मीर इस शेर में मोहब्बत की उस लाचारी को बयाँ कर रहे हैं जहाँ तड़प दोनों तरफ़ है, मगर मिलन की राह में अनगिनत दीवारें हैं। आशिक जब ख़ुद महबूब की ओर कदम बढ़ाना चाहता है, तो हिचकिचाहट, अदब या अपनी बेबसी उसके पाँव थाम लेती है। और अगर महबूब कभी मीर की तरफ आने की कोशिश भी करे, तो ज़माना, पहरेदार और समाज की बंदिशें उसे रोक देती हैं। यह चाहत और हालात के बीच फँसी दो दिलों की बेहद दिलकश और दर्दभरी तस्वीर है।
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