मैं पीर-ए-इश्क़ हूँ मजनूँ मुरीद है मेरा वो आशिक़ी में ख़लीफ़ा रशीद है मेरा

“I am the spiritual guide of love, and Majnun is disciple to me; in the realm of devout passion, my righteous successor is he.”

— शाह तुराब अली क़लंदर
अर्थ

मैं प्रेम का पीर (मार्गदर्शक) हूँ और मजनूँ मेरा मुरीद (शिष्य) है; आशिक़ी के रास्ते में वह मेरा सच्चा और योग्य उत्तराधिकारी है।

विस्तार

इस शेर में शायर बड़े ही फ़ख़्र और शोख़ी से अपनी मोहब्बत का रुतबा बयां कर रहे हैं। जिस मजनूँ को दुनिया दीवानगी और इश्क़ की आख़िरी हद मानती है, शायर उसे महज़ अपना शागिर्द और मुरीद बता रहे हैं। सूफ़ी रिवायत के लफ़्ज़ों का सहारा लेकर वो कहते हैं कि अगर मजनूँ इश्क़ का सच्चा वारिस और ख़लीफ़ा है, तो उस इश्क़ का असल पीर और उस्ताद मैं ही हूँ।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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