तिरी नासिहा ये चुनाँ चुनीं, कि हैं ख़ुद-पसंदी के सब क़रीं
न दिखाई दे गी तुझे कभी, कहीं जो भी किसी ने बुझा दिया
— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
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