था वो बरतर सना-ओ-मा से नियाज़ फिर वही अब सना-ओ-मा देखा

“Far beyond all praise and laudation was He, O Niyaz; yet now, in every hymn of praise, it is He alone who is seen.”

— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
अर्थ

हे नियाज़, वह ईश्वर कभी हर प्रशंसा और विवरण से परे था, लेकिन अब हर स्तुति और हर रूप में वही दिखाई दे रहा है।

विस्तार

इस ख़ूबसूरत सूफ़ी शेर में शाह नियाज़ रूहानी समझ के एक गहरे मोड़ की बात कर रहे हैं। शुरुआत में साधक को लगता है कि ख़ुदा इतना अज़ीम और परे है कि इंसानी अल्फ़ाज़ में उसकी तारीफ़ हो ही नहीं सकती। मगर जब दिल और मारिफ़त की आँखें खुलती हैं, तो यह अहसास होता है कि कायनात की हर तारीफ़ में और तारीफ़ करने वाले हर जर्रे में वही महबूब-ए-हक़ीक़ी जलवागर है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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