अपना ही कुछ तसर्रुफ़-ए-औहाम है कि हम चेहरे पे हक़ के पाते हैं पर्दा नक़ाब का

“It is but the sway of our own illusions that we / Find cast upon the face of Truth the shadow of a veil.”

— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
अर्थ

यह केवल हमारे अपने वहम और भ्रम का प्रभाव है कि हमें परम सत्य के चेहरे पर नक़ाब या पर्दा दिखाई देता है।

विस्तार

इस ख़ूबसूरत शेर में सूफ़ी फलसफ़े की गहरी बात कही गई है कि परम सत्य (हक़) कभी हमसे छुपा हुआ नहीं होता। हम अक्सर यह शिकायत करते हैं कि ईश्वर या सच्चाई पर कोई रहस्यमयी पर्दा पड़ा है, लेकिन शायर याद दिलाते हैं कि यह पर्दा हक़ के चेहरे पर नहीं, बल्कि हमारे अपने भ्रम और वहम की देन है। असल में हक़ तो हर पल बिल्कुल बेनक़ाब और सामने मौजूद है, बस हमारी अपनी सीमित सोच और ख़यालों ने उस पर एक पर्दा डाल रखा है।

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