चादर से मौज की न छुपे चेहरा आब का बुरक़ा हिजाब का न हो बुरक़ा हुबाब का

“The face of water cannot hide beneath the wave's sheer sheet, nor can the fragile bubble serve as a true veil of concealment.”

— शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
अर्थ

पानी का चेहरा लहर की चादर से नहीं छुप सकता, और न ही बुलबुला उसे छुपाने वाला कोई पर्दा बन सकता है।

विस्तार

शायर ने पानी, लहर और बुलबुले की खूबसूरत मिसाल देकर एक गहरी बात कही है। जैसे लहर की चादर या एक पारदर्शी बुलबुला पानी के असली रूप को छिपा नहीं सकता, वैसे ही इंसान की असलियत या सच भी किसी दिखावटी परदे के पीछे नहीं छुप सकता। यह शेर हमें याद दिलाता है कि हक़ीक़त इतनी साफ़ और स्वाभाविक होती है कि कोई भी बनावटी हिजाब उसे बेनक़ाब होने से रोक नहीं पाता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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