“Cast out every drop of the craving for rank and fame; / A relentless thief it is, buried deep within the heart.”
दिल से पद और प्रतिष्ठा के लोभ का एक कतरा भी निकाल दीजिए। यह एक ऐसा खतरनाक चोर है जो दिल की गहराइयों में धँसा हुआ है।
इस शेर में शायर पद, प्रतिष्ठा और शोहरत की लालसा (हुब्ब-ए-जाह) से बचने की बेहद खूबसूरत और गहरी सीख दे रहे हैं। वे इस चाहत की तुलना एक ऐसे शातिर चोर से करते हैं, जो दिल की गहराइयों में छुपकर इंसान का सुकून और उसकी रूहानी पाकीज़गी लूट लेता है। शायर समझाते हैं कि इस भूख का एक कतरा भी दिल में बाकी नहीं रहना चाहिए, क्योंकि नाम-ओ-नमूद की यह तमन्ना इंसान को अंदर से खोखला कर देती है।
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