মোরা ভোরের বেলা ফুল তুলেছি, দুলেছি দোলায়,
বাজিয়ে বাঁশি গান গেয়েছি বকুলের তলায়॥
“মোরা ভোরের বেলা ফুল তুলেছি, দুলেছি দোলায়, বাজিয়ে বাঁশি গান গেয়েছি বকুলের তলায়॥”
— रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ
सुबह हमने फूल तोड़े, झूले पर झूले, और बकुल वृक्ष के नीचे बाँसुरी बजाते हुए गीत गाए।
विस्तार
यह प्यारा दोहा सुबह की ताज़ा उमंग और बचपन की मासूमियत को दर्शाता है। कल्पना कीजिए कि आप अपने दोस्तों के साथ सुबह-सुबह फूल तोड़ रहे हैं, झूले पर झूल रहे हैं। फिर, बकुल के पेड़ की खुशबूदार छाया में बैठकर, आप बाँसुरी बजाते हैं और साथ में गीत गाते हैं। यह एक खुशनुमा याद है, जहाँ प्रकृति, संगीत और दोस्तों का साथ है। यह सुबह की सुंदरता और बेफिक्र पलों का जश्न है, जो हमें सरल खुशियों और प्रकृति से जुड़ने की याद दिलाता है।
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