ग़ज़ल
পুরানো সেই দিনের কথা
وہ پرانے دنوں کی باتیں
पुरानो सेई दिनेर कोथा" पुरानी यादों और गहरी दोस्ती पर एक मार्मिक चिंतन है। वक्ता एक लंबे समय से बिछड़े हुए दोस्त के साथ फिर से मिलने की तीव्र इच्छा व्यक्त करता है, पुरानी खुशियों और दुखों को याद करता है, और अपने बंधन को फिर से जगाने की उम्मीद करता है।
वीडियो · रवींद्रनाथ टैगोर
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1
পুরানো সেই দিনের কথা ভুলবি কি রে হায়।
ও সেই চোখে দেখা, প্রাণের কথা, সে কি ভোলা যায়॥
अरे, क्या तुम उन पुराने दिनों की बातें भूल पाओगे? वो आँखों देखी और दिल से निकली बातें, भला उन्हें कैसे भूला जा सकता है।
2
আয় আর একটিবার আয় রে সখা, প্রাণের মাঝে আয়।
মোরা সুখের দুখের কথা কব, প্রাণ জুড়াবে তায়॥
आओ, हे मित्र, एक बार फिर मेरे हृदय में आओ। हम अपनी सुख-दुःख की बातें करेंगे, और इससे मन को शांति मिलेगी।
3
মোরা ভোরের বেলা ফুল তুলেছি, দুলেছি দোলায়,
বাজিয়ে বাঁশি গান গেয়েছি বকুলের তলায়॥
सुबह हमने फूल तोड़े, झूले पर झूले, और बकुल वृक्ष के नीचे बाँसुरी बजाते हुए गीत गाए।
4
হায় মাঝে হল ছাড়াছাড়ি, গেলাম কে কোথায়।
আবার দেখা যদি হল সখা, প্রাণের মাঝে আয়॥
हाय, हम बीच में ही बिछड़ गए, कौन कहाँ चला गया। अगर फिर कभी मुलाकात हो दोस्त, तो मेरे दिल में आ जा।
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