Thou hast made me endless, such is thy pleasure. This frail vessel thou emptiest again and again, and fillest it ever with fresh life.

“Thou hast made me endless, such is thy pleasure. This frail vessel thou emptiest again and again, and fillest it ever with fresh life.”

— रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

ईश्वर ने मुझे अनंत बनाया है, यही उसकी इच्छा है। वह इस नश्वर पात्र को बार-बार खाली कर देता है और इसे हर बार नए जीवन से भर देता है।

विस्तार

यह सुंदर दोहा एक गहरे आध्यात्मिक सत्य को दर्शाता है। यह कहता है कि एक उच्च शक्ति ने हमें एक अनंत सार, एक शाश्वत आत्मा प्रदान की है, और यह एक दिव्य आशीर्वाद है। हमारा शारीरिक शरीर, जिसे एक 'कमजोर पात्र' कहा गया है, नश्वर है। यह खाली होने के चक्रों से गुजरता है, जैसे जब एक पुराना चरण समाप्त होता है या जीवन ही समाप्त होता है, केवल फिर से नई ऊर्जा, नए उद्देश्य, या यहां तक कि नए जीवन से भरने के लिए। यह नवीनीकरण, विकास और परिवर्तन के निरंतर चक्र पर प्रकाश डालता है, हमें आश्वस्त करता है कि यद्यपि हमारा भौतिक स्वरूप बदल सकता है या नष्ट हो सकता है, हमारा सच्चा सार किसी अनंत चीज़ का हिस्सा है, जिसे एक दिव्य स्रोत द्वारा लगातार ताज़ा और बनाए रखा जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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