नदामत है बना कर इस चमन में आशियाँ मुझ को मिला हमदम यहाँ कोई न कोई हम-ज़बाँ मुझ को

“I rue that in this garden grove I built my nest among; for I found here no companion, nor one who shared my tongue.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मुझे इस बाग़ में अपना आशियाना बनाने पर पछतावा है, क्योंकि यहाँ मुझे न तो कोई साथी मिला और न ही कोई अपनी बात समझने वाला हमज़बाँ मिला।

विस्तार

शायर यहाँ एक गहरे अकेलेपन और बेगानेपन का दर्द बयां कर रहे हैं। उन्हें पछतावा है कि उन्होंने इस दुनिया रूपी चमन में अपना बसेरा तो बना लिया, लेकिन यहाँ कोई ऐसा नहीं मिला जो उनके दिल के हाल को समझ सके या उनकी ज़बान बोल सके। यह शेर उस घुटन भरी तन्हाई को छूता है, जहाँ इंसान भरी महफ़िल के बीच रहकर भी खुद को पूरी तरह अजनबी महसूस करता है।

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