किस लिए फिरते हैं ये शम्स ओ क़मर दोनों साथ किस को ये ढूँडते हैं बरहना-सर दोनों साथ

“Why do they wander together thus, both the sun and the moon? Whom do they seek, bareheaded in grief, together across the sky?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

यह सूरज और चाँद दोनों साथ-साथ किसलिए भटक रहे हैं? वे दोनों नंगे सिर होकर आखिर किसे ढूँढ रहे हैं?

विस्तार

शायर यहाँ पूरे ब्रह्मांड को अपने जैसा ही बेचैन और विरह में डूबा हुआ देखता है। सूरज और चाँद का आकाश में लगातार चक्कर काटना उसे किसी बिछड़े हुए अज़ीज़ की बेताब खोज जैसा लगता है। उर्दू शायरी में 'बरहना-सर' यानी नंगे सिर भटकना गहरे मातम और दीवानगी की निशानी है; मानो सिर्फ़ इंसान ही नहीं, बल्कि यह पूरी कायनात भी किसी लापता महबूब के गम में दर-ब-दर मारी फिर रही है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

1 / 13Next →