कहा जो तूने कि मनका ढला तो आऊँगा — नज़ीर अकबराबादी

कहा जो तूने कि मनका ढला तो आऊँगा हो बात कुछ न कुछ इसमें भी मक्र-ओ-फ़न की सी

“You said, 'When the day declines, then I shall come to you'— Yet in these words there lurks some trace of guile and artful ruse.”

— नज़ीर अकबराबादी

अर्थ

तूने कहा कि जब दिन ढलेगा तब मैं आऊँगा, पर तेरी इस बात में भी कुछ न कुछ छल और चतुराई की झलक है।

विस्तार

माशूक़ ने वादा किया है कि जब वह घड़ी या वह लमहा आएगा, जब मनका ढलेगा, तब मैं तुम्हारे पास आऊँगा। मगर शायर इस वादे पर पूरा भरोसा नहीं कर पाता। उसे लगता है कि इस प्यारी-सी बात में भी कहीं न कहीं थोड़ी चालाकी और फ़न छिपा हुआ है। माशूक़ ऐसे बहाने बनाने में माहिर है जो सुनने में मीठे लगते हैं, पर कभी पूरे नहीं होते। इसलिए आशिक़ हल्की-सी मुस्कान और नरम शक के साथ सोचता है कि यह दिलासा भी शायद पहले की तरह टालने का एक प्यारा तरीक़ा ही हो। यह मुहब्बत और शरारती शक का एक नाज़ुक मंज़र है।

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