ઘાલી ન બીડી મુખ લૈ ચૂમીઓ, લહાવો ન લીધો ઋતુનાં સુખોનો. ગાયાં ગવાડ્યાં નવ ગીત બાગે, તાનો થકી સોરઠ મેઘ રાગે;

“No paan offered, no lips did I kiss,The season's deep pleasures, completely missed.No fresh songs sung, nor heard in the garden's grace,No melodic flourishes in Sorath or Megh Raga's space.”

— नर्मद
अर्थ

मुख में पान नहीं दिया, न ही चुंबन लिए; ऋतु के सुखों का लाभ नहीं उठाया। बाग में नए गीत न तो गाए गए और न ही गवाए गए, सोरठ और मेघ राग की तानों के साथ।

विस्तार

यह दोहा उस जीवन का वर्णन करता है जो पूरी तरह से जिया नहीं गया, खुशियों और रोमांस के छूटे हुए अवसरों से भरा है। इसमें उस मधुर अंतरंगता में शामिल न होने का अफसोस व्यक्त किया गया है, जैसे पान खिलाना और चुंबन लेना, या बस हर मौसम के साधारण सुखों का आनंद न ले पाना। यह पद बागों में नए गीत न गाए जाने या गवाए जाने पर भी खेद व्यक्त करता है, विशेष रूप से 'सोरठ मेघ राग' की मनमोहक धुन में। यह जीवन को जीवंत और पूर्ण बनाने वाले सुंदर, अंतरंग और संगीतमय अनुभवों को न पकड़ पाने पर एक मार्मिक चिंतन है।

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