જોગી હર્ષે ચિંતન કરતા સચ્ચિદાનંદનું ને, દુ:ખી અજ્ઞાઃ મરણ ઈછતા સુજ્ઞ તે રંગ જુએ.

“The yogi joyfully contemplates Sachchidananda, While the sorrowful ignorant wish for death, the wise perceive the same hue.”

— नर्मद
अर्थ

योगी आनंदपूर्वक सच्चिदानंद का चिंतन करते हैं, वहीं दुखी अज्ञानी मृत्यु की कामना करते हैं; फिर भी ज्ञानी दोनों में एक ही सार देखते हैं।

विस्तार

यह दोहा जीवन के दो विपरीत रास्तों को खूबसूरती से दर्शाता है। एक तरफ जोगी हैं, जो सच्चिदानंद, यानी अस्तित्व, चेतना और परमानंद की परम वास्तविकता का चिंतन करते हुए आनंद से भरे रहते हैं। उनकी शांति इसी गहन सत्य से जुड़ने में है। दूसरी ओर, वे दुखी और अज्ञानी लोग हैं जो अपने कष्टों में इतने खोए हुए हैं कि वे मृत्यु की कामना करते हैं, उन्हें कोई रास्ता नहीं दिखता। लेकिन फिर, सच्चे ज्ञानी लोग भी हैं। वे उस 'रंग' या सार को देखते हैं जो जोगियों को आनंदित करता है, यह समझते हुए कि सच्ची समझ इसी शाश्वत, आनंदमय वास्तविकता को पहचानने में है, बजाय इसके कि क्षणिक दुखों में फँसे रहें। यह हमारी सोच को बदलकर उस मूलभूत दिव्य सत्य को देखने के बारे में है।

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