“Oh, though I know you as Ketaki, you appear like Champa; You offer a sweet perfume, yet no bee comes near.”
ओह, भले ही मैं तुम्हें केतकी जानता हूँ, तुम चंपा जैसी दिखती हो; तुम अच्छी सुगंध देती हो, फिर भी कोई भँवरा पास नहीं आता।
यह दोहा एक ऐसे फूल की बात करता है, जो शायद केतकी या चंपा हो सकता है, और अपनी मनमोहक खुशबू के लिए जाना जाता है। यह इतनी अच्छी सुगंध देता है, फिर भी आश्चर्यजनक रूप से, मधुमक्खियाँ इसके पास नहीं आतीं। यह काव्यात्मक अवलोकन अक्सर एक रूपक के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह किसी ऐसे व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करता है जिसमें उत्कृष्ट गुण या आकर्षक विशेषताएँ हों - जैसे एक प्यारी खुशबू - लेकिन किसी कारण से, वह दूसरों को अपने करीब लाने या संबंध बनाने में विफल रहता है। यह इस विचार पर प्रकाश डालता है कि कभी-कभी, स्वाभाविक सुंदरता या अच्छाई होने पर भी, एक अदृश्य बाधा या वास्तविक आकर्षण की कमी हो सकती है जो दूसरों को दूर रखती है, जिससे वास्तविक बातचीत या प्रशंसा नहीं हो पाती, ठीक वैसे ही जैसे मधुमक्खियाँ सुगंधित फूल से दूर रहती हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
