જટાને સંકેલી, વડ તજ ગિરીયે જઇ રહ્યા. પ જટાને લાંબી લાંબી, મુળ થડથિ થોડેક દૂર જે;

“Gathering in its tangled roots, the banyan departed, heading for the mountain.Those roots, so long and far-flung, stretched a small way from its parent trunk.”

— नर्मद
अर्थ

बर्गद का पेड़ अपनी लंबी और फैली हुई जटाओं (जो उसके मुख्य तने से थोड़ी दूर थीं) को समेटकर पहाड़ की ओर चला गया।

विस्तार

यह दोहा एक साधु या ऋषि का सुंदर चित्रण करता है। कल्पना कीजिए कि उनके लंबे, उलझे हुए बाल हैं, जो बरगद के पेड़ की लटकती जड़ों जैसे दिखते हैं, जो अक्सर मुख्य तने से थोड़ी दूरी पर होते हैं। वह इन जटाओं को समेटते हैं, जो सांसारिक बंधनों से उनकी विरक्ति का प्रतीक है। फिर वह बरगद के पेड़ की आरामदायक छाया छोड़ देते हैं, जो स्थिरता का प्रतीक है, और पहाड़ों की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा गहन एकांत, आध्यात्मिक उन्नति, और संभवतः शांत जंगल में ध्यान या आत्मज्ञान की तलाश को दर्शाती है।

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