ખરેખરાં દુ:ખી નિત, ચીતમાં ચિંતા ભારી. મળવાની શી વાત, રાતની રાહ બહુ પાજી;

“Truly, always sorrowful, with heavy worries in the heart.What talk is there of meeting? The wait for night is very cruel.”

— नर्मद
अर्थ

व्यक्ति सचमुच हमेशा दुखी रहता है, जिसके हृदय में भारी चिंताएँ होती हैं। मिलने की बात ही क्या है, जब रात का इंतज़ार इतना क्रूर है?

विस्तार

यह दोहा उस व्यक्ति के बारे में है जो लगातार गहरे दुःख में है, जिसका हृदय चिंताओं से भरा हुआ है। ऐसे व्यक्ति के लिए, खुशी खोजना या किसी से मिलने के बारे में सोचना भी असंभव हो जाता है। कवि बताता है कि कैसे समय भी एक दुश्मन बन जाता है; रात के इंतज़ार में भी, जो आमतौर पर आराम लाती है, बहुत लंबा और कठिन महसूस होता है। यह गहरी निराशा को खूबसूरती से दर्शाता है जहाँ हर पल एक संघर्ष है, और आशा दूर लगती है, जिससे समय का बीतना दर्दनाक रूप से धीमा और बोझिल हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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