सब ता बफ़्ता चौंक पड़ी तेरी अहद में — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“All that was asleep awoke with a start in your age; Only my fortune it was that stirred less from its slumber.”
अर्थ
तेरे ज़माने में हर सोई हुई चीज़ चौंक कर जाग उठी; बस एक मेरा नसीब था जो कम ही जागा।
विस्तार
शायर यहाँ अपनी किस्मत से नरमी से शिकायत कर रहा है। वह कहता है कि तेरे ज़माने में, तेरे दौर में सब कुछ जाग उठा, सब कुछ चौंककर ज़िंदा हो गया। सारी दुनिया मानो सचेत और जागी हुई लगने लगी। बस एक चीज़ थी जो नहीं जागी, और वह थी मेरी अपनी किस्मत। जब चारों ओर सब कुछ जी उठा, तब भी मेरा नसीब सोया रहा, उसने बमुश्किल आँखें खोलीं। इन शब्दों में एक हल्की सी उदासी है, बदनसीबी का एक ठंडा सा साँस। माहौल में इतनी रौशनी और उम्मीद होते हुए भी शायर का भाग्य अकेला ही सुस्त और बेजान पड़ा रहा।
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