हर चंद इज़्तिराब में मैनी कमी नके — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“Though in my restless anguish I made no least abatement, Even so, your boundless heedlessness grew not a whit the less.”
अर्थ
हालाँकि मेरी बेचैनी में कोई कमी नहीं आई, फिर भी वहाँ (तुम्हारी) बहुत-सी बेपरवाही ज़रा भी कम न हुई।
विस्तार
शायर एक गहरी बेचैनी में डूबा हुआ है, एक ऐसी तड़प जो कभी कम नहीं होती। वह चाहे कितना भी दुख सहे, उसकी यह बेकरारी ज़रा भी नहीं घटती। और दूसरी ओर, महबूब की लापरवाही भी वैसी की वैसी बनी रहती है। जैसे उसकी बेचैनी कम होने का नाम नहीं लेती, वैसे ही महबूब की बेरुखी और अनदेखी भी कभी कम नहीं होती। यह एक खामोश शिकायत है, जिसमें स्वीकार भी छिपा है। उसकी चाहत और उसकी बेरुखी दोनों एक जैसी रहती हैं, वक़्त या दर्द से बेअसर। यह शेर उस बेबसी को बयान करता है, जब आप ऐसे किसी से प्यार करते हैं जो नरम नहीं पड़ता, और आपका दिल भी चैन नहीं पाता।
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