मुए ये इश्क़ में जब तक वो मेहरबाँ न हुआ — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“I died in love, so long as that beloved showed no grace to me; A bane upon the soul is that heart which no bane of the soul would be.”
अर्थ
मैं इश्क़ में तब तक मरता रहा जब तक वह महबूब मुझ पर मेहरबान न हुआ; वह दिल जान का रोग है जो जान का रोग न बना।
विस्तार
शायर इश्क़ के दर्द भरे सफ़र की बात करता है। जब तक महबूब मेहरबान नहीं हुआ, आशिक़ इश्क़ में घुल-घुलकर मरता रहा, इंतज़ार और तड़प में डूबा रहा। फिर दिल को लेकर एक खूबसूरत बात आती है। असल में वही दिल कीमती है जो जान की मुसीबत बन जाए, जो तड़प और बेचैनी से भर जाए। अगर दिल ने कभी दर्द महसूस ही न किया, कभी मीठी पीड़ा का ठिकाना न बना, तो वह बेकार है। जो दिल कभी तुम्हारी जान के लिए आज़माइश न बना, वही सच्ची मुसीबत है। सच्चा जज़्बा उसी दिल में बसता है जो यह दर्द जानता हो। इसलिए शायर इश्क़ के इस दर्द को दिल के ज़िंदा होने की निशानी मानता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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