जब जानशी तासीर कि दुश्मन भी वहाँ-से — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“Then would you know the truth of it, O turning wheel of days, if even your foe had come forth from that place, as I did, in my own way.”
अर्थ
तब तू असर को जान पाता, ऐ ज़माने की गर्दिश, अगर तेरा दुश्मन भी मेरी तरह उस जगह से निकलता।
विस्तार
शायर समय और किस्मत के लगातार घूमते चक्र से बात कर रहा है। वह कहता है कि तू अपनी सच्ची तासीर, अपनी क्रूरता का असली असर तभी समझ पाता, जब तेरा अपना दुश्मन भी मेरी ही तरह इन्हीं मुश्किलों से गुज़रता। अगर किस्मत को खुद वही दर्द सहना पड़ता जो हम सहते हैं, तो उसे पता चलता कि ये चोटें कितनी भारी होती हैं। इसमें एक हल्की-सी शिकायत है, ज़िंदगी की कठिनाइयों के खिलाफ़ एक नरम विरोध। शायर चाहता है कि समय को अपनी ही दवा का स्वाद मिले, ताकि वह उस पीड़ा को जान सके जो वह आम इंसानों को आसानी से बाँट देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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