मैं हम से मरता हूँ हाँ अब से उसकी — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“I die of longing, yes, for her from this moment on— yet from the messenger's tongue no word of hers will come.”
अर्थ
मैं उसकी चाहत में तड़प-तड़प कर मरता हूँ, पर क़ासिद की ज़बान से उसका कोई पैग़ाम नहीं निकलता।
विस्तार
यह शेर एक ऐसे प्रेमी की बात कहता है जो गहरी तड़प में डूबा है। वह बेचैनी से मर रहा है, बस अपने महबूब से कुछ सुनने को तरस रहा है। उसने संदेश पहुँचाने के लिए क़ासिद भेजा, पर क़ासिद की ज़बान से भी कोई पैग़ाम नहीं निकलता। न कोई जवाब आता है, न कोई शब्द। यहाँ दर्द सिर्फ़ इंतज़ार में नहीं, बल्कि किसी भी बात के पूरी तरह न होने में है। महबूब कुछ नहीं भेजता, और प्रेमी अधर में लटका रह जाता है, न आगे बढ़ पाता है, न चैन पाता है। यह उस बेबसी को छूता है जब किसी की ख़ामोशी हर जवाब से ज़्यादा भारी लगती है।
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