कुछ ग़ैर से हो तो नहीं कही है पे जो पूछो — मोमिन ख़ाँ मोमिन

कुछ ग़ैर से हो तो नहीं कही है पे जो पूछो तो वो मैं मुकरता है कि मैं कुछ नहीं कहता

“If something passed with the stranger, there is nothing said; yet when you ask, he denies it to me, saying that I say nothing at all.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

अगर ग़ैर से कुछ हुआ भी हो तो कुछ कहा नहीं जाता; पर जब पूछो तो वह मुझसे मुकर जाता है कि मैं तो कुछ कहता ही नहीं।

विस्तार

यह शेर प्रेम में उलझन और इनकार के एक बहुत ही मानवीय पल को छूता है। प्रेमी को शक होता है कि महबूब और किसी और के बीच कुछ हुआ है, शायद कोई चुपके से बात। पर जब सीधे पूछा जाता है, तो महबूब बस पीछे हट जाता है और सब कुछ नकार देता है, यह कहते हुए कि मैं तो कुछ कह ही नहीं रहा। यहाँ जो महसूस होता है और जो कहा जाता है, उनके बीच एक कोमल तनाव है। यह खामोशी खुद मायने रखती है। कुछ न कहकर महबूब प्रेमी को शक और तड़प में छोड़ देता है। यह याद दिलाता है कि दिल के मामलों में अनकही बातें अक्सर शब्दों से ज़्यादा बोलती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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